September 29, 2026

Star News 21

Suresh Upmanyu Editor in Cheif 9917125300

राधिका नगरी बरसाना में भोले की बम , प्रदीप मिश्रा की कथा में लाखों श्रद्धालु शिव महापुराण की कथा में हुए शामिल

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बरसाना में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिव महापुराण के पहले दिन सजी ईशा-गौर की मनोहारी झांकी
पहले ही दिन खचाखच भरा कथा पंडाल, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए समिति करेगी अतिरिक्त व्यवस्था

रिपोर्टर हीरालाल और टीकम सिंह के साथ नरेश ठाकुर की रिपोर्ट

बरसाना-मथुरा। प्रेम सरोवर के समीप गाजीपुर संकेत मध्य क्षेत्र के विशाल मैदान में आयोजित शिव महापुराण कथा के पहले ही दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से शिव महापुराण का श्रवण करने के लिए उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बरसाना पहुंचे। कथा स्थल का विशाल पंडाल पहले ही दिन श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। कथा के दौरान ईशा-गौर की मनोहारी झांकी भी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए विठलेश सेवा समिति और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के बावजूद कथा स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए समिति द्वारा अतिरिक्त पंडाल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं किए जाने की तैयारी की जा रही है।
बरसाना प्रेम और भक्ति की पवित्र भूमि : पं. प्रदीप मिश्रा
कथा के प्रथम दिवस पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि बरसाना ब्रज की पवित्र भूमि है। यहां माता राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम एवं करुणा की अनुभूति होती है। इस पावन भूमि पर भगवान भोलेनाथ की कथा का श्रवण करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि बरसाना आने वाले भक्त केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि यहां मौजूद प्रेम, करुणा और भक्ति की उस धारा में डूब जाते हैं, जिसका आरंभ राधारानी से होता है और भाव रूप में भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचता है। राधारानी और उनकी अष्टसखियों की गाथा हमें यह संदेश देती है कि प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें समर्पण, सेवा और माधुर्य का संगम हो।
भगवान शिव पर विश्वास के साथ प्रयास भी जरूरी
कथा के दौरान पं. प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए विभिन्न पत्रों का उल्लेख करते हुए भगवान शिव के प्रति आस्था और विश्वास के प्रसंग सुनाए। इस दौरान भगवान शिव में आस्था रखने वाले एक परिवार को मंच पर बुलाया गया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि भगवान शिव पर विश्वास रखते हुए लगातार प्रयास किए और परिवार के तीन बेटों को सरकारी नौकरी मिली। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को विश्वास के साथ कर्म और प्रयास करते रहने का संदेश दिया। कथा स्थल पर इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए।
पितरों की स्मृति में करें सेवा और पुण्य कार्य
पितृ पक्ष के संदर्भ में पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कई लोगों ने पितरों को केवल हवा या भूत-प्रेत जैसी धारणाओं से जोड़ दिया है, जबकि सनातन परंपरा में पूर्वजों की स्मृति, उनके प्रति श्रद्धा और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष के इन दिनों में अपने पूर्वजों की स्मृति में दान-पुण्य, सेवा और अच्छे कार्य किए जाने चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता और समाजहित में किए गए कार्यों को पुण्यकारी माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूर्वजों का स्मरण करते हुए सद्कार्यों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
अरावन देवता की कथा से किन्नर समाज की आस्था का वर्णन
कथा के दौरान पं. प्रदीप मिश्रा ने महाभारत से जुड़े अरावन देवता के प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अरावन को अर्जुन और उलूपी का पुत्र माना जाता है और किन्नर समुदाय में उन्हें विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। दक्षिण भारत में किन्नर समुदाय के लिए ‘अरावनीÓ शब्द के प्रचलन का संबंध भी अरावन की परंपरा से जोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर अरावन देवता से जुड़ी विशेष धार्मिक परंपराएं आयोजित की जाती हैं। इनमें किन्नर समुदाय द्वारा अरावन देवता के साथ प्रतीकात्मक विवाह की परंपरा भी शामिल है। मान्यता के अनुसार विवाह के अगले दिन अरावन देवता के बलिदान की स्मृति में वैवाहिक अनुष्ठान का समापन किया जाता है।
पहले दिन ही बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या, अतिरिक्त पंडाल की तैयारी
शिव महापुराण के प्रथम दिवस कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पूरा बरसाना भक्तिमय नजर आया। विशाल पंडाल भर जाने के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। विठलेश सेवा समिति और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए आगामी दिनों में अतिरिक्त पंडाल, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु सुविधापूर्वक शिव महापुराण कथा का श्रवण कर सकें। कथा स्थल पर ईशा-गौर की झांकी के दर्शन के दौरान भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

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